उज्जैन के लिए दो दिन सबसे सही हैं — भस्म आरती के बाद भी बाकी दिन ठीक से निकलता है और बाहर के मंदिर भी आराम से हो जाते हैं।
पहला दिन — महाकाल और पुराना शहर
- सुबह 4 बजे — भस्म आरती (परमिट ज़रूरी — बुकिंग कैसे करें)। परमिट न हो तो सुबह 7 बजे की आरती या सामान्य दर्शन।
- सुबह 7 बजे — होटल में आराम और नाश्ता।
- सुबह 10 बजे — महाकाल लोक कॉरिडोर।
- दोपहर 12 बजे — हरसिद्धि माता मंदिर, शक्तिपीठ, पास ही।
- दोपहर बाद — गढ़कालिका और भर्तृहरि गुफ़ा।
- सूर्यास्त — राम घाट की महा आरती। 30 मिनट पहले पहुँचें।
दूसरा दिन — बाहर के मंदिर
- सुबह 8 बजे — काल भैरव (लगभग 8 किमी)। जल्दी जाएँ, लाइन तेज़ी से बढ़ती है।
- सुबह 9:30 — मंगलनाथ, मंगल ग्रह का जन्मस्थान माना जाता है।
- सुबह 11 बजे — सांदीपनि आश्रम।
- दोपहर बाद — वेधशाला और शाम को इस्कॉन मंदिर।
घूमने के लिए
मंदिर 10–12 किमी में फैले हैं। ड्राइवर सहित गाड़ी सबसे आसान है, बुज़ुर्गों के साथ तो ज़रूरी। पहले दिन पुराने शहर में ऑटो भी चल जाता है।
सुझाव: तीसरा दिन हो तो ओंकारेश्वर की एक दिन की यात्रा जोड़ें।
समूह में आ रहे हैं? अपना रेट पूछें — समूह को छूट मिलती है। इसी प्लान का रेट WhatsApp पर भेज देंगे।